सारस के साथ दोस्ती की शुरुआत
2022 में (फरवरी या अगस्त के आसपास) आरिफ को उनके गांव मंडका में एक घायल सारस मिला। उन्होंने महीनों तक उसका इलाज किया, घर पर रखा, दवा-खाना दिया। ठीक होने के बाद सारस कहीं नहीं गया—वो आरिफ के साथ घूमता, हाथ से दाना खाता, बाइक पर पीछे बैठकर चलता, जैसे परिवार का हिस्सा हो। वीडियो वायरल हुए, लोग हैरान थे कि एक जंगली पक्षी (जो भारत का राज्य पक्षी भी है) इंसान से इतना जुड़ गया।
लेकिन Wildlife Protection Act के तहत सारस को रखना गैरकानूनी है (वो protected species है), इसलिए मार्च 2023 में वन विभाग ने उसे जब्त कर लिया और पहले संरक्षित क्षेत्र, फिर कानपुर Zoo में रख दिया। आरिफ बहुत दुखी हुए—कई दिनों तक रोते रहे, नींद नहीं आई। सारस भी Zoo में आरिफ को देखकर पंख फैलाकर, दौड़कर मिलने की कोशिश करता था (वीडियो में दिखता है, दिल टूट जाता है)।
NGO की शुरुआत और नया दोस्त
उसी दर्द से प्रेरित होकर आरिफ ने सारस के नाम पर NGO शुरू किया, जहां अब वो घायल जानवरों-पक्षियों की मदद करते हैं। इंसानियत का सबूत!
फिर कुछ समय बाद (2023 में) एक घायल बाज़ उनके पास आया। आरिफ ने उसका भी इलाज किया—अस्पताल में भर्ती, घर पर रात-दिन देखभाल। ठीक होने पर छोड़ा, लेकिन बाज़ वापस लौट आया! अब वो उनके साथ रहता है, घर में घूमता है—सारस जैसी ही दोस्ती।
यह दिखाता है कि जानवर भी सच्चा प्यार और वफादारी समझते हैं। आरिफ की कहानी इंसानियत, compassion और wildlife laws के बीच बैलेंस की मिसाल है। ❤️
कुछ लोग कहते हैं कि कानून सख्त होना चाहिए, लेकिन ऐसे केस में दिल भी टूटता है। आपकी पोस्ट ने फिर से इस भावना को जगा दिया—बहुत खूबसूरत शेयर! 🫶