पाखंड और अंधविश्वास का जाल इतना खतरनाक होता है कि इसमें फंसने वाला न सिर्फ अपना पैसा, सम्मान और समय गंवाता है, बल्कि कभी-कभी अपनी जिंदगी और आत्मसम्मान भी खो बैठता है। महाराष्ट्र के नासिक में हाल ही में सामने आए अशोक खरात उर्फ कैप्टन खरात के मामले ने इस सच्चाई को एक बार फिर नंगा कर दिया है।
कौन है अशोक खरात?
अशोक खरात (67 वर्षीय) खुद को मर्चेंट नेवी का रिटायर्ड कैप्टन बताते थे। उन्होंने अपनी इस पृष्ठभूमि को इस्तेमाल कर खुद को एक शक्तिशाली ज्योतिषी, आध्यात्मिक गुरु और 'गॉडमैन' के रूप में स्थापित किया। नासिक में उनका ऑफिस (कनाडा कॉर्नर क्षेत्र में) और सीन्नर तालुका के मिरगांव में ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट चलता था। लोग दूर-दूर से आते थे — कुंडली दिखाने, ग्रह-दोष दूर कराने, भविष्य सुधारने, नौकरी, शादी, व्यापार या पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए।
वे हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स के साथ फोटो दिखाते, राजनीतिक रसूख का दावा करते और लाखों रुपये फीस वसूलते थे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, मात्र 15 साल में उन्होंने 100 से 200 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर ली — फार्महाउस, मंदिर ट्रस्ट, गाड़ियां, नकदी और अन्य संपत्तियां।
पाखंड का असली चेहरा
एक 35 वर्षीय महिला (कुछ रिपोर्ट्स में 28-35 साल की बताई गई) की शिकायत पर नासिक क्राइम ब्रांच की यूनिट-1 ने उन्हें गिरफ्तार किया। महिला ने आरोप लगाया कि 2022 से 2025 तक खरात ने पूजा-पाठ, अनुष्ठान और ज्योतिष उपाय के नाम पर उसे बार-बार दुष्कर्म किया। पुलिस के अनुसार, खरात महिलाओं को उनके निजी या पारिवारिक दुखों का हल बताने के बहाने बुलाते, उन्हें नशीला पदार्थ (इंटॉक्सिकेंट) खिलाते, हिप्नोटाइज करने का दावा करते और फिर शोषण करते।
जांच में और चौंकाने वाले खुलासे हुए:
उनके पास से एक पेन ड्राइव बरामद हुई, जिसमें 58 अलग-अलग महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स मिले। कई वीडियो गुप्त कैमरों से रिकॉर्ड किए गए लगते हैं।
कई महिलाएं शादीशुदा थीं, कुछ शिक्षित और सम्मानित परिवारों से। वे खुद अपनी समस्याओं (पति की नौकरी, संतान, स्वास्थ्य, रिश्ते) के समाधान की उम्मीद में गईं और फंस गईं।
खरात डर का सहारा लेते — "पति मर जाएगा", "परिवार पर आफत आएगी", "ग्रह दोष लगेगा" आदि। प्लास्टिक के सांप, बाघ की खाल वाले कपड़े, जंगली इमली के बीज (इन्हें चमकाकर "एनर्जाइज्ड स्टोन" कहकर लाखों में बेचते) जैसी चीजों से फर्जी तांत्रिक माहौल बनाते।
कुछ महिलाओं को ब्लैकमेल भी किया जाता था ताकि वे चुप रहें।
पुलिस ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की है। अब तक छह से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। उनके ठिकानों से पिस्टल, कारतूस और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष का नाम भी विवाद में आया, हालांकि उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
आज भी लोग क्यों फंसते हैं?
यह सवाल बहुत गहरा है। आज के समय में, जब विज्ञान, शिक्षा और इंटरनेट उपलब्ध है, फिर भी लाखों लोग "भविष्य बदलने", "ग्रह शांति" या "शॉर्टकट सफलता" के चक्कर में ऐसे ठगों के जाल में फंस जाते हैं। कारण कुछ इस प्रकार हैं:
डर और असुरक्षा: जीवन में अनिश्चितता होती है — नौकरी, रिश्ते, स्वास्थ्य, संतान। लोग सोचते हैं कि कोई "बाबा" या "कैप्टन" एक मंत्र, रत्न या पूजा से सब ठीक कर देगा। अंधविश्वास इस डर को हथियार बनाता है।
भावनात्मक कमजोरी: खासकर महिलाएं (शादीशुदा या अकेली) जब पारिवारिक दबाव, मानसिक तनाव या रिश्तों की समस्या से गुजरती हैं, तो वे सहारा ढूंढती हैं। खरात जैसे लोग ठीक इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं — पहले भरोसा जीतते, फिर शोषण करते।
रसूख और दिखावा: खरात जैसे लोग बड़े-बड़े लोगों की फोटो, महंगे ऑफिस, मंदिर ट्रस्ट और "कैप्टन" टाइटल से credibility बनाते हैं। लोग सोचते हैं — "इतने बड़े आदमी, इतना रसूख, तो झूठ कैसे बोल सकते हैं?"
समाज में जागरूकता की कमी: स्कूल-कॉलेज में वैज्ञानिक सोच, तर्क और साक्ष्य-आधारित निर्णय सिखाने की जगह अक्सर रूढ़िवादी मान्यताएं हावी रहती हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे "गुरु" वायरल होते रहते हैं।
आसान रास्ते की लालच: मेहनत, सलाह, थेरेपी या कानूनी/मेडिकल मदद से समस्या सुलझाने की बजाय "एक पूजा से सब ठीक" जैसा शॉर्टकट आकर्षक लगता है।