हाल के महीनों में LPG सिलेंडर की कीमतें बढ़ने, सप्लाई में दिक्कतें और कुछ क्षेत्रों में कमर्शियल गैस की राशनिंग की वजह से इनकी डिमांड और भी बढ़ गई है।
आपकी शेयर की गई वीडियो जैसी सीन कई जगह देखने को मिल रहे हैं—सड़कों पर ठेले लगाकर या गाड़ी पर लादकर लोग गोबर के उपले बेच रहे हैं। ये खासकर उन घरों में इस्तेमाल हो रहे हैं जहाँ लोग चूल्हे या पारंपरिक स्टोव पर खाना बनाते हैं, या हवन-पूजा के लिए, कीटनाशक के रूप में, या अब तो LPG के विकल्प के तौर पर भी।
क्यों बढ़ रही है डिमांड?
LPG की समस्या: हाल ही में (2026 में) ईरान संघर्ष और कमर्शियल गैस सप्लाई में कटौती की वजह से कई जगहों पर लोगों ने LPG की बुकिंग में दिक्कत महसूस की। इससे कई परिवारों ने पारंपरिक ईंधन जैसे गोबर के उपले, कोयला या लकड़ी की तरफ रुख किया।
कीमत और उपलब्धता: सड़क किनारे 2-8 रुपये पीस में बिक रहे हैं, जबकि ऑनलाइन (Amazon, Flipkart आदि) पैकेट में 40-50 रुपये तक एक उपला पड़ता है। दिल्ली-एनसीआर में इंडियामार्ट, जस्टडायल जैसी साइट्स पर सप्लायर्स और डीलर्स की लिस्ट है, और ग्रेटर नोएडा में भी कई मैन्युफैक्चरर्स हैं।
अन्य इस्तेमाल: पूजा, हवन, दीवारों पर लेप (कूलिंग के लिए), खाद, और अब एक्सपोर्ट भी हो रहा है (गल्फ देशों में ऑर्गेनिक फ्यूल के तौर पर)।
वीडियो जैसा सीन
वीडियो में दिख रहा है कि एक व्यक्ति ठेले पर ढेर सारे सूखे गोबर के उपले लिए सड़क पर जा रहा है—ये आम तौर पर ग्रामीण इलाकों या शहरों के बाहरी हिस्सों में देखा जाता है, जहाँ गौशालाओं से गोबर आसानी से मिल जाता है। लोग इसे रोज़ी-रोटी का जरिया भी बना रहे हैं, जैसे दिल्ली में कुछ वीडियो में दिखा कि एक व्यक्ति रोज़ 300-350 उपले बेचकर अच्छी कमाई कर रहा है।