हाल ही में (मार्च 2026 के आसपास) एक इंटरव्यू या बयान में दिया गया। यह Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों (खासकर LPG गैस लोडेड) को सुरक्षित गुजरने की विशेष रियायत/अनुमति के संदर्भ में आया है।
संदर्भ क्या है?
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव/संघर्ष के दौरान Strait of Hormuz (तेल-गैस का महत्वपूर्ण मार्ग) प्रभावित हुआ।
ईरान ने कुछ जहाजों को ब्लॉक किया, लेकिन भारत के दो जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई (जिससे भारत में LPG/गैस संकट कम हुआ)।
इलाही ने स्पष्ट कहा कि यह रियायत भारत सरकार की कूटनीति या पीएम मोदी के कारण नहीं, बल्कि भारतीय जनता की सहानुभूति (sympathy/solidarity) के कारण दी गई।
उन्होंने कहा: अधिकांश भारतीयों ने ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाई, अमेरिकी/इजरायली "युद्ध/हमलों" की निंदा की (खासकर बच्चों/मासूमों पर), और ईरान को भारतीयों की गैस की जरूरत के बारे में बताया गया, जिसके आधार पर अनुमति मिली।
यह बयान कितना सटीक है?
कई न्यूज़ रिपोर्ट्स (Economic Times, Moneycontrol, First India आदि) में इलाही का बयान दर्ज है, जहां उन्होंने भारतीय जनता की "solidarity against oppression" और "against war" का जिक्र किया।
उन्होंने मोदी या भारतीय सरकार/कूटनीति का नाम नहीं लिया, बल्कि लोगों की मानवीयता पर जोर दिया।
यह बयान सोशल मीडिया (X, Facebook, Instagram) पर वायरल हो रहा है, खासकर राजनीतिक बहस में—कुछ इसे मोदी सरकार की कूटनीति की "नाकामी" बताते हैं, जबकि अन्य इसे ईरान की तरफ से जनता को श्रेय देने का तरीका मानते हैं।
राजनीतिक निहितार्थ
ईरान ने अतीत में भारत के साथ मजबूत संबंध रखे (सस्ता तेल, चाबहार पोर्ट), लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और भारत की US-Israel के साथ नजदीकी के कारण रिश्ते जटिल हैं।
यह बयान दिखाता है कि ईरान भारत की जनता (खासकर जो उनके पक्ष में आवाज उठाते हैं) को अलग से महत्व दे रहा है, न कि सिर्फ सरकारी नीति को।
भारत में LPG/तेल की कमी के बीच यह रियायत राहत देती है, लेकिन ईरान इसे "मानवता" से जोड़कर पेश कर रहा है।