सुप्रिया श्रीनेत ने 1 मार्च 2026 को X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा:
"जरा सोचिए, अमरीकी कठपुतली पाकिस्तान के जोकर प्रधानमंत्री तक ने ईरान के लिए संवेदना के शब्द कहे और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की निंदा की। लेकिन नरेंद्र मोदी एक शब्द तक नहीं कह पाए। निंदा तो दूर, शोक संवेदना भी व्यक्त नहीं कर पाये। अमेरिका से आपका यह डर मेरे देश पर कलंक है।"
यह बयान US-इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के संदर्भ में आया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर **अयातुल्लाह अली खामेनेई** की मौत हो गई। यह हमला 28 फरवरी या 1 मार्च 2026 के आसपास हुआ, जिसके बाद ईरान ने UAE, कुवैत, सऊदी अरब आदि पर जवाबी मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री **शहबाज शरीफ** ने खामेनेई की मौत को "शहादत" बताते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की। उन्होंने कहा कि राज्याध्यक्षों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक खामेनेई की मौत या ईरान पर हमले की सीधी निंदा नहीं की है। इसके बजाय:
- उन्होंने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से बात की और ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की, UAE के नुकसान पर शोक जताया और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की।
- इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से भी बात की और "शत्रुता जल्द समाप्त" करने की बात कही।
- भारत ने UAE के साथ एकजुटता जताई (जहाँ लाखों भारतीय रहते हैं)।
विपक्ष (कांग्रेस सहित) का आरोप है कि मोदी सरकार अमेरिका और इज़राइल के प्रति अत्यधिक झुकाव दिखा रही है, जिससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, गुटनिरपेक्षता और ईरान के साथ पुराने संबंध (जैसे चाबहार पोर्ट, ऊर्जा) प्रभावित हो रहे हैं। प्रियंका गांधी ने हमले को "घृणित" बताया, जबकि अन्य नेताओं ने इसे "नैतिक कायरता" कहा।
मोदी सरकार का पक्ष: क्षेत्र की जटिल स्थिति में सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और आर्थिक हितों (UAE, US, इज़राइल के साथ मजबूत संबंध) को देखते हुए। स्थिति अभी भी तेजी से बदल रही है, और दुनिया भर से संयम की अपील हो रही है।