न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन (Atul Sreedharan) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थल (खासकर निजी संपत्ति) पर उपासकों की संख्या को कानून-व्यवस्था के नाम पर सीमित नहीं किया जा सकता। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर समुदाय को शांतिपूर्ण ढंग से पूजा-अर्चना करने की सुविधा सुनिश्चित करे।
कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिलाधिकारी (डीएम/कलेक्टर) को लगता है कि बड़ी संख्या में नमाजियों के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और वे इसे संभालने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से ट्रांसफर की मांग करनी चाहिए।
यह टिप्पणी एक याचिका के दौरान आई, जिसमें याचिकाकर्ता मुनासिर खान (या मुनाजिर खान) ने आरोप लगाया था कि रमजान के दौरान प्रशासन ने केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग आना चाहते थे। राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था के खतरे का हवाला दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह अधिकारियों की अक्षमता को दर्शाता है, न कि समाधान है।
कोर्ट ने दोहराया कि निजी संपत्ति पर पूजा के लिए राज्य से अनुमति की जरूरत नहीं है, जब तक कि यह सार्वजनिक भूमि पर न फैले।