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होली पर मिथिला पेंटिंग से सजे कुर्तों का कलेक्शन:कलर ब्लाइंडनेस के बावजूद कुंदन रच रहे सफलता की इबारत, इनके बनाए कुर्ते बन रहे पहचान
TLN
Editorial Team
रंगों को ठीक से न देख पाने वाला एक कलाकार जब रंगों से अपनी अलग दुनिया रच दे, तो वह साधारण नहीं, असाधारण बन जाता है। समस्तीपुर के कलर ब्लाइंडनेस कलाकार कुंदन कुमार राय ने यह साबित कर दिया है कि पहचान आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि काबिलियत और जुनून से बनती है। इस होली उन्होंने मिथिला पेंटिंग से सजे विशेष कुर्ते-कुर्तियां डिजाइन कर बाजार में धूम मचा दी है। उनका स्लोगन 'मैथिल हैं तो मैथिल पहनें' सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय बाजार तक छा गया है। पारंपरिक मिथिला कला को आधुनिक परिधान से जोड़ने का उनका यह प्रयोग युवाओं को खासा पसंद आ रहा है। कुंदन कहते हैं, मेरा मान, सम्मान और गौरव मेरी कला है। मैं हमेशा कुछ नया और इनोवेटिव करने की कोशिश करता हूं, ताकि रोजगार सृजन हो और कलाकारों को खुद को साबित करने का मौका मिले। कला के क्षेत्र में राज्य स्तर पर मिल चुकी है पहचान उनकी कला को पहले भी राज्य स्तर पर पहचान मिल चुकी है। मतदाता जागरूकता पर आधारित उनकी मिथिला पेंटिंग को चुनाव विभाग ने आइकॉन बनाया था। इसके लिए बिहार के तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक कुमार ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। कोरोना जागरूकता पर बनाई गई 108 मिथिला पेंटिंग्स गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुईं। छठ पूजा पर बनाए गए मिथिला सूप देश-विदेश में सराहे गए। हाल ही में एक बैंक के एलडीएम के ऑर्डर पर डिजाइन किए गए विशेष कुर्तों ने उनके होली कलेक्शन को नई पहचान दी। कुंदन मानते हैं कि कलाकार भावुक होते हैं और अक्सर आर्थिक चुनौतियों से जूझते हैं। कई लोग फ्री सैंपल मांगते हैं, पैसे नहीं देते, इससे कलाकारों का मन टूटता है। कुंदन का सपना है कि हर कलाकार सम्मान, प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता के साथ समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाए। कुंदन की उपलब्धियां - वर्णांधता के बावजूद मिथिला पेंटिंग में राष्ट्रीय पहचान - मतदाता जागरूकता पेंटिंग राज्य स्तर पर सम्मानित - 108 कोरोना पेंटिंग्स वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज - होली पर मिथिला डिजाइनर कुर्तों का विशेष कलेक्शन - कलाकारों को डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने की पहल
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