लखनऊ विश्वविद्यालय में करीब 220 साल पहले बने लाल बारादरी को लेकर छिड़ा विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। 22 फरवरी, रविवार को फेंसिंग से शुरू हुआ विवाद 3 दिन में और आक्रामक हुआ।विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की सख्ती भी देखने को मिली, लेकिन छात्रों के 2 अलग-अलग गुट आमने-सामने आने के बाद माहौल और गरमाता दिखा। कुछ लोग इसे गंभीर साजिश मानकर कैंपस में धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप भी लगा रहे हैं। इस पूरे मामले को हैंडल करने में विश्वविद्यालय प्रशासन की चूक भी साफ तौर पर नजर आती हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रवक्ता इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर पीके घोष का कहना है कि लाल बारादरी मस्जिद नहीं, बल्कि इमामबाड़ा है। लाल ईंटों से बने 12 दरवाजे होने से इसका नाम लाल बारादरी पड़ा। देखिए लाल बारादरी की 3 तस्वीरें… जर्जर अवस्था में थी बिल्डिंग, जान माल के नुकसान की आशंका लाल बारादरी पर लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि लाल बारादरी की इमारत जीर्ण शीर्ण और जर्जर अवस्था में थी। इसलिए इस इमारत में मौजूद यूको बैंक और स्टाफ क्लब हटाए गए। इमारत में बोर्ड लगा दिए जाने के बावजूद बच्चे इसमें अनधिकृत रूप से प्रवेश करते थे। रील बना रहे थे। इमारत किसी भी समय गिर सकती है। किसी की जान माल का नुकसान न हो इसलिए इमारत में सभी का प्रवेश वर्जित किया गया है। इसका किसी समुदाय विशेष से लेना-देना नहीं है। लाल बारादरी के जीर्णोद्वार के लिए ASI से पत्राचार किया जा रहा है। यदि कहीं से कोई धन प्राप्त होगा तो इमारत का जीर्णोद्धार किया जायेगा। मस्जिद नहीं है लाल बारादरी लखनऊ के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर पीके घोष का कहना है कि लाल बारादरी का इतिहास में मस्जिद होने का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इस भवन की बनावट और आर्किटेक्चर मस्जिद के हिसाब से नहीं बना है। इसमें किबला और इसका मुख्य आर्च है ही नहीं। मस्जिद में होने वाला दालान भी नहीं है। खुतबा पढ़ने के लिए मिंबर भी नहीं है। मस्जिद में किबला क्यों जरूरी? प्रो. घोष कहते हैं कि मस्जिद में एक दीवार और मुख्य-आर्च मक्का की दिशा में होती है, जिसे किबला कहते हैं। मस्जिद में किबला सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित काबा की दिशा है, जिसकी ओर दुनिया भर के मुसलमान नमाज के दौरान अपना चेहरा रखते हैं। उन्होंने बताया कि इस भवन का निर्माण नवाब नसीरुद्दीन ने उन्नीसवीं सदी में कराया था। असल में यह मस्जिद नहीं बल्कि इमामबाड़ा है। लाल ईंटों से बने 12 दरवाजों वाला भवन होने के कारण इसे लाल बारादरी नाम दिया गया। पहले चलती थी बैंक और कैंटीन पिछले कुछ सालों से ही यह बिल्डिंग खराब हालत में थी। इसकी छत टूट कर लोगों को चोटिल कर रही थी। जिसके बाद इस बिल्डिंग में चल रहे बैंक, क्लब और कैंटीन को बंद कर दिया गया था। तत्कालीन कुलपति डॉ. आलोक राय के निर्देश पर बोर्ड लगा दिया गया था। इस बीच 21 फरवरी को रजिस्ट्रार डॉ. भावना मिश्रा ने एक पत्र हसनगंज थाने को भेज कर उस पूरे जर्जर बारादरी परिसर को बैरिकेट करने और लोहे की जालियां लगाने के लिए पुलिस फोर्स की मांग की थी। इससे पहले 2 फरवरी को निर्माण अधीक्षक श्यामलेश तिवारी को भी उस बिल्डिंग के चारों तरफ फेंसिंग लगवा कर चुनाई करने के निर्देश दिए गए थे, जिससे कि उसके अंदर कोई भी आ जाना सके। 7 को नोटिस, 6 पूर्व छात्रों की एंट्री बैन लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने, इफ्तार आयोजन और भवन में तोड़फोड़ के आरोप में विश्वविद्यालय प्रशासन ने 7 छात्रों को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा 6 पूर्व छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। इससे पहले लाल बारादरी में जबरन घुसने के आरोप में 13 को लखनऊ पुलिस ने हाजिर होने की नोटिस जारी की थी। अब जान लेते हैं...बीते 3 दिनों का घटना क्रम… विवाद की पूरी जड़ जानिए यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर लाल बारादरी बिल्डिंग है। 22 फरवरी, रविवार को जैसे ही खोदाई शुरू हुई बड़ी संख्या में NSUI के स्टूडेंट मौके पर पहुंच गए। छात्रों ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कहा- लाल बारादरी ASI द्वारा संरक्षित स्थल है, इसलिए बिना उसकी अनुमति के कोई कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। इसके बाद मुस्लिम छात्रों ने नमाज पढ़ी। रविवार को जिस जगह मुस्लिम छात्रों ने नमाज पढ़ी और इफ्तार किया, सोमवार को उसी जगह हिंदू छात्रों ने जय भवानी, जय श्रीराम के जयकारे लगाए। नमाज पढ़ने वाले छात्र उस स्थल पर निर्माण रुकवाने पहुंचे थे तो दूसरे गुट ने पहुंचकर नारेबाजी करते हुए उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।
Reader Comments