सरकार रेलवे की फाइनेंस कंपनी IRFC में अपनी 4% तक हिस्सेदारी बेच रही है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जा रही है। यह ऑफर नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए आज से खुल गया है। वहीं, रिटेल निवेशक गुरुवार, 26 फरवरी को अपनी बोलियां लगा सकेंगे। इसके लिए फ्लोर प्राइस ₹104 प्रति शेयर तय किया गया है। मंगलवार, 24 फरवरी को IRFC का शेयर ₹109.40 पर बंद हुआ था। यानी सरकार निवेशकों को मौजूदा कीमत से डिस्काउंट पर शेयर ऑफर किया है। हालांकि आज ये शेयर करीब 4% नीचे 105 रुपए पर आ गया है। सरकार की हिस्सेदारी घटकर 82.36% रह जाएगी IRFC में सरकार की कुल हिस्सेदारी 86.36% है। OFS के जरिए सरकार 2% हिस्सेदारी बेचेगी, जिसमें 2% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का 'ग्रीन शू ऑप्शन' भी है। अगर यह पूरा 4% हिस्सा बिक जाता है, तो कंपनी में सरकारी हिस्सेदारी घटकर 82.36% रह जाएगी। OFS के जरिए ₹5,430 करोड़ जुटाना चाहती है सरकार डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव ने कहा कि ₹104 प्रति शेयर के हिसाब से 4% हिस्सेदारी (करीब 52.26 करोड़ शेयर) बेचने पर सरकार को लगभग ₹5,430 करोड़ मिलेंगे। बेस ऑफर साइज 26.13 करोड़ शेयरों का रखा गया है। आज से खुला OFS, रिटेल निवेशक कल बोली लगा सकेंगे DIPAM सचिव के मुताबिक, यह ऑफर नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए बुधवार, 25 फरवरी को खुल गया है। वहीं, रिटेल निवेशक 26 फरवरी को अपनी बोलियां लगा सकेंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है 'ग्रीन शू ऑप्शन'? जब किसी शेयर की बिक्री (IPO या OFS) में डिमांड उम्मीद से ज्यादा होती है, तो कंपनी या सरकार को तय कोटे से अधिक शेयर बेचने का अधिकार मिलता है। इसे 'ग्रीन शू ऑप्शन' या 'ओवर-अलॉटमेंट ऑप्शन' कहते हैं। IRFC के मामले में सरकार ने 2% अतिरिक्त शेयर बेचने का विकल्प सुरक्षित रखा है। IRFC के बारे में जानें IRFC को 12 दिसंबर, 1986 को शुरू किया गया था। यह भारतीय रेलवे की एक खास फाइनेंस शाखा है, जिसका काम देश और विदेश के कैपिटल मार्केट से फंड जुटाना है। IRFC भारत सरकार के रेल मंत्रालय के तहत आने वाली एक नवरत्न पब्लिक सेक्टर कंपनी है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक महत्वपूर्ण नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (NBFC-IFC) के रूप में भी रजिस्टर्ड है। IRFC ने रेलवे और उससे जुड़ी संस्थाओं के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है। रेलवे के सालाना बजट और योजनाओं के एक बड़े हिस्से के लिए फंड का इंतजाम यही कंपनी करती है।