महोबा में भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य, परिवहन और बैंक सेक्टर सहित एक दर्जन विभागों के श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें पेंशन वृद्धि, ठेका प्रथा की समाप्ति और नए लेबर कोड में सुधार जैसी 8 सूत्रीय मांगें शामिल थीं। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर महोबा कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज उठा। जिले के सरकारी और अर्ध-सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर उड़ीसा के पुरी में हुए 21वें अखिल भारतीय अधिवेशन के प्रस्तावों को लागू करने की मांग की। इस प्रदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, परिवहन निगम, को-ऑपरेटिव बैंक और सहकारी बैंक समेत एक दर्जन विभागों के कर्मचारी शामिल थे। जिलाधिकारी को सौंपे गए 8 सूत्रीय मांग पत्र में न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह करने की प्रमुख मांग शामिल थी। कर्मचारियों ने इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने पर भी जोर दिया। इसके अतिरिक्त, ईपीएफ अंशदान के लिए वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये और ईएसआई के लिए इसे 42 हजार रुपये करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के नए लेबर कोड पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और वर्किंग कंडीशन कोड में सुधार की मांग करते हुए कहा कि श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के 'अंत्योदय' की भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए। ज्ञापन में स्कीम वर्कर और ठेका श्रमिकों को स्थायी करने, साथ ही सरकारी नौकरियों में भर्ती पर लगी अघोषित रोक को तुरंत हटाने की भी मांग की गई। मजदूर नेताओं पुनीत और डॉक्टर दिवाकर ने चेतावनी दी कि केंद्रीय श्रम मंत्री से पहले भी आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं आए हैं। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, ईश्वर दयाल, गणेशी लाल चौरसिया और अवधेश अवस्थी सहित कई मजदूर नेता मौजूद थे। संगठन ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।