फिरोजाबाद जिला कारागार में होली के अवसर पर बंदियों द्वारा प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। यह पहल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ बंदियों के आत्मनिर्भरता और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जेल प्रशासन के अनुसार, इस गुलाल को बनाने में जेल परिसर में उगाई जाने वाली सब्जियों जैसे चुकंदर, गाजर और पालक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गुलाब और गेंदे के फूलों से भी प्राकृतिक रंग तैयार किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी रासायनिक रंग का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे यह त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित है। जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ना और उन्हें कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने जानकारी दी कि बंदियों द्वारा निर्मित यह हर्बल गुलाल कारागार में मुलाकात के लिए आने वाले परिजनों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, इसे खुले बाजार में भी बिक्री के लिए रखा जाएगा। यह प्रयास बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होगा। इससे बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें अपने श्रम के माध्यम से सम्मानजनक आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। बाजार में उपलब्ध रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में प्राकृतिक सब्जियों और फूलों से तैयार यह हर्बल गुलाल लोगों के लिए एक सुरक्षित विकल्प प्रस्तुत करता है। स्थानीय लोगों ने जेल प्रशासन की इस पहल की सराहना की है। उनका मानना है कि यह कदम न केवल होली के त्योहार को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बनेगा।